Tuesday, March 2, 2010

महगाई पर मच मच

आज पूरा देश महगाई हा हा कार कर रहा है। देश के नेता अपनी सियासत की रोटी सेक रहे है। खुद तो भर पेट खाना खा रहे है॥ और देश की आवाम को पेट पर गीला कपडा बाधकर सोने को मजबूर कर रहे है। देश भर में आये दिन कही न कही नेता सरकारके खिलाफ मोर्चा बंदी करते दिख जाते है। इस मोर्चे बंदी में नेता तो अपना हित सोच लेते है। लेकिन उस आम आदमी के बारे में जरा भी नहीं सोच ते। जिसके वोट से वो जीत कर सडक से संसद तक का सफर तयकरते है। देश में इस समय बजट सत्र चल रहा है। सरकार के पास कई विधेह्क है जिन्हें वो इस सत्र में लाना चाहती है। लेकिन महगाई के लिए सरकार केवल आश्वासन दे रही है। कर कुछ नहीं रही प्रधान मंत्री मन मोहन सिंह कहते है की जल्द महगाई पे काबू पा लिया जाइये गा। लेकिन कब ये सायद प्रधान मंत्री को भी नहीं मालूम। संसद में विपक्च भी हंगामा से जयादा कुछ नहीं कर रहा है। कभी स्पीकर के आसन तक आ जाना तो कभी सदन से वक् आउट कर जाना। क्या महगाई के लिए सरकार ही जिमेदार है। मेरा मानना है। की महगाई के लिए एक सरकार नहीं बल्कि पूरा देश और उसके नेता और उनकी नीतिया जिम्मे दार है।अगर देश और आम आदमी का सही मायने विकास करना है । तो हमें खुद से पहले देश के बारे में सोचना होगा.

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